Monday, 19 March 2018

Saturday, 9 September 2017

पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य के गठन में दें मेरा साथ


1 सितम्बर को मेरा जन्म दिन था। मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि लोग मेरे संघर्ष से इतने प्रभावित हैं। जिस तरह मेरे साथियों ने अन्याय के खिलाफ मेरी आवाज को सराहा उससे मुझे बहुत ऊर्जा मिली। मेरा वादा है कि मैं जरूरत मंद लोगों की लड़ाई लड़ता रहूंगा, चाहे मुझे इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़ी। जो लोग मुझे और मेरे स्वभाव को जानते हैं वे अच्छी तरह समझते हैं कि लीक से हटकर चलना मेरा स्वभाव है। अन्याय का विरोध करना मेरा शौक है। सत्ता विरोधी काम करने में मुझे मजा आता है। मेरे काफी साथियों ने जन्म दिन पर मुझमें विश्वाश व्यक्त करते हुए मुझसे सच्ची समाजसेवा की अपेक्षा की है।
          साथियों यह मेरा सौभाग्य है कि जन्म दिन पर लोहिया जी विचारधारा को लेकर चल रही सोशलिस्ट पार्टी ने मुझे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संयोजक बनाया। इस सम्मान को मैं बहुत बड़ी जिम्मेदारी मानता हूं। दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग प्रदेश के रूप में देखना मेरा सपना रहा है। मैं चाहता हूं कि यहां के लोगों के आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने तथा देश और समाज के उत्थान में बड़ी भागीदारी को समझते हुए लंबे समय से हो रही मांग का सम्मान करते हुए इस क्षेत्र को अलग प्रदेश बनाया जाए
         मैंने ठान ली है कि अब किसी भी हालत में इस क्षेत्र को अलग प्रदेश बनवाना ही है। हम लोग अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गठन के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ने जा रहे हैं। जो साथी मुझे दिल से चाहते हैं तथा मेरे काम को पसंद करते हैं उनसे मेरा आग्रह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गठन में मेरा साथ दें। आप लोग मुझसे वादा करें कि इस आंदोलन में आप मेरे साथ रहेंगे। मेरा वादा है कि इस क्षेत्र को अलग प्रदेश बनवाकर हम लोग किसानों मजदूरों व्यापारी वर्ग का जीवन स्तर सुधारेंगे ओर युवाओं का भविष्य संवारेंगे। अपने प्रदेश को देश का सबसे खुशहाल प्रदेश बनाएंगे।


 आपका अपना
चरण सिंह राजपूत
राष्ट्रीय अध्यक्ष, फाइट फॉर राइट
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयोजक, सोशलिस्ट पार्टी

Thursday, 17 August 2017

अस्तित्व बचाना है तो अपने बीच में से नायक तैयार करो




     कुछ लिखने का मन कर रहा है। चारों ओर निगाह दौड़ने पर सुईं गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन खत्म होने पर मर गए 63 बच्चों पर आकर अटक जा रही हैं। 63 बच्चों के शवों का मंजर आंखों के सामने आ रहा है तो कलेजा फट जा रहा है। क्या मनोस्थिति होगी बच्चों के परिजनों की ? देश को कहां ले जाएगा यह व्यवसायीकरण का यह दौर। किसके लिए कमा रहे हैं हम पैसा ? किसको दिखा रहे हैं राजनीति और सरकारों का रुतबा ? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बस चिंता इस बात की है कि किस तरह से मुसलमानों को सबक सिखाया जाए। भय का माहौल पैदा कर कमजोर की आवाज दबाई जाये। देश के प्रधानमंत्री को चिंता इस बात की है कि किस तरह से विश्व में छाया जाए। सत्ता का रुतबा बरकरार रखने के लिए हिन्दू वोटबैंक का कब्जाया जाये। भाड़ में जाए देश और भाड़ में जाए जनता।
    राजनीति का व्यापार देश को तबाह कर रहा है। कोई युवा रोजगार न मिलने पर आत्महत्या कर रहा है तो कोई रोजगार छीनने से। दिल्ली जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे रेलवे अप्रेंटिस में से नौकरी छिनने पर 40 युवाओं ने आत्महत्या की है। लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। अभाव में मजदूर आयेदिन मर रहे हैं। कोचिंग सेंटर के नाम से प्रसिद्ध हो चुका राजस्थान का कोटा मौत का शहर बन चुका है। मैं तो यह कहूंगा कि व्यवस्था को लेकर जितनी भी मौत हो रही हैं ये सब हत्या की श्रेणी में आती हैं। इन सबके लिए कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया सब जिम्मेदार हैं। देश को चलाने के लिए ये चार स्तम्भ बनाये गए हैं तो ये तंत्र क्या कर रहे हैं। बस पैसा ही सब कुछ हो गया है। जरा सोचो जिस दिन इन बच्चों की जगह आपके बच्चे होंगे तो क्या हाल होगा आपका ? क्या करोगे इस पैसों का ?
    ऐसे ही बच्चे और युवा दम तोड़ते रहे तो वह दिन दूर नहीं कि एक दिन आप भी अपने बच्चों के लिए ऐसे ही रो रहे होंगे जैसे ये गरीब लोग रो रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार मेडिकल प्रबंधन और इससे जुड़े व्यापारियों ने मिलकर बच्चों की हत्या की है। ये मौत नहीं नर संहार है। देश में चल रहे सत्ता के खेल से मानवता, संवेदलशीलता, कर्तव्यपरायणता, भाईचारा मेल-मोहब्बत, प्यार स्नेह जैसे शब्द जैसे समाज से गायब होते जा रहे हैं। मैंने जो पढ़ा-लिखा है और मेरी जिंदगी का जो भी अनुभव रहा है। उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि देश में इससे बुरा माहौल नहीं रहा होगा। मैं इसके लिए सिर्फ शासन प्रशासन को ही दोष नहीं देना चाहूंगा, इन सबके लिए समाज भी दोषी है। जिस समाज में कमजोर की मदद करने की परम्परा रही है। बुरे वक्त में सहारा देने परम्परा रही है। मिल-जुलकर काम करने की परम्परा रही है। उस देश में कमजोर को दबाना, बुरे वक्त में उसकी हंसी उड़ाना। व्यक्तिवादी बनना, गरीब को कीड़े मकौड़े समझना समाज की नियति बनती जा रही है।
     यदि ये बच्चे नेताओं नौकरशाह या पूंजीपतियों के रहे होते तो देश में अब तक आग लग चुकी होती और ये ही लोग लगाते जो बस बच्चों की हत्या कर रहे हैं और लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। मैं देश के किसान-मजदूर गरीब और बेसहाय लोगों से कहना चाहूंगा कि चाहे सत्ता पक्ष और या फिर विपक्ष दोनों संपन्न लोगों के लिए काम कर रहे हैं। ये सब लोग भी तो पूंजीपति ही हैं। कैसे आएगा आपके और आपके बच्चों के लिए दर्द ? जब तक देश का किसान-मजदूर देश की सत्ता नहीं कब्जायेगा तब तक ऐसे ही हमारे बच्चों की हत्या होती रहेगी। अभी से जुट जाओ अपने बीच में से कोई क्षेत्र का जनप्रतिनिधि बनाने के लिए। प्रधानमंत्री गरीबी का ढकोसला कर पूंजीपतियों के लिए काम कर रहे हैं ।
     2019 के चुनाव में किसी भी हालत में पूंजीपतियों के हाथों में सत्ता नहीं जाने देनी है। अब लड़ाई नौकरी लेने या बचाने की नहीं। खेत बोने या काटने की नहीं। बच्चों को पढ़ने या पढ़ाने की नहीं बल्कि अस्तित्व बचाने की है। देश का प्रधानमंत्री बना बैठा यह व्यक्ति व्यापारी है, जिसने देश के हर तंत्र को बेचने की ठान ली है। बेचना इस व्यक्ति के डीएनए में है। जिस स्टेशन पर चाय बेचता था वह स्टेशन ही बेच रहा है। जिस ट्रेन में चलता था वह ट्रेन ही बेच दे रहा है। जिस एअर इंडिया में हवाई सफर करता था, उसको ही बेच दे रहा है। जल्द ही भूमि अधिग्रहण विधेयक लाकर किसानों की जमीन भी पूंजीपतियों को बेचने वाला है। श्रम कानून में संशोधन कर मजदूर की मजदूरी बेचने वाला है। देश की सुरक्षा बेचने की तैयारी है। यानि कि सुब कुछ बेचना है। यह देश सम्पन्न लोगों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। यह बात आम आदमी को समझ लेनी होगी।