Saturday, 9 September 2017
Thursday, 17 August 2017
अस्तित्व बचाना है तो अपने बीच में से नायक तैयार करो
कुछ लिखने
का मन कर रहा है। चारों ओर निगाह दौड़ने पर सुईं गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल
कॉलेज में आक्सीजन खत्म होने पर मर गए 63 बच्चों पर आकर अटक जा रही हैं। 63
बच्चों के शवों का मंजर आंखों के सामने आ रहा है तो कलेजा फट जा रहा है।
क्या मनोस्थिति होगी बच्चों के परिजनों की ? देश को कहां ले जाएगा यह
व्यवसायीकरण का यह दौर। किसके लिए कमा रहे हैं हम पैसा ? किसको दिखा रहे
हैं राजनीति और सरकारों का रुतबा ? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बस
चिंता इस बात की है कि किस तरह से मुसलमानों को सबक सिखाया जाए। भय का
माहौल पैदा कर कमजोर की आवाज दबाई जाये। देश के प्रधानमंत्री को चिंता इस
बात की है कि किस तरह से विश्व में छाया जाए। सत्ता का रुतबा बरकरार रखने
के लिए हिन्दू वोटबैंक का कब्जाया जाये। भाड़ में जाए देश और भाड़ में जाए
जनता।
राजनीति का व्यापार देश को तबाह कर रहा है। कोई युवा रोजगार
न मिलने पर आत्महत्या कर रहा है तो कोई रोजगार छीनने से। दिल्ली जंतर मंतर
पर आंदोलन कर रहे रेलवे अप्रेंटिस में से नौकरी छिनने पर 40 युवाओं ने
आत्महत्या की है। लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। अभाव में मजदूर
आयेदिन मर रहे हैं। कोचिंग सेंटर के नाम से प्रसिद्ध हो चुका राजस्थान का
कोटा मौत का शहर बन चुका है। मैं तो यह कहूंगा कि व्यवस्था को लेकर जितनी
भी मौत हो रही हैं ये सब हत्या की श्रेणी में आती हैं। इन सबके लिए
कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया सब जिम्मेदार हैं। देश को
चलाने के लिए ये चार स्तम्भ बनाये गए हैं तो ये तंत्र क्या कर रहे हैं। बस
पैसा ही सब कुछ हो गया है। जरा सोचो जिस दिन इन बच्चों की जगह आपके बच्चे
होंगे तो क्या हाल होगा आपका ? क्या करोगे इस पैसों का ?
ऐसे ही बच्चे और युवा दम तोड़ते रहे तो वह दिन दूर नहीं कि एक दिन आप भी अपने बच्चों के लिए ऐसे ही रो रहे होंगे जैसे ये गरीब लोग रो रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार मेडिकल प्रबंधन और इससे जुड़े व्यापारियों ने मिलकर बच्चों की हत्या की है। ये मौत नहीं नर संहार है। देश में चल रहे सत्ता के खेल से मानवता, संवेदलशीलता, कर्तव्यपरायणता, भाईचारा मेल-मोहब्बत, प्यार स्नेह जैसे शब्द जैसे समाज से गायब होते जा रहे हैं। मैंने जो पढ़ा-लिखा है और मेरी जिंदगी का जो भी अनुभव रहा है। उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि देश में इससे बुरा माहौल नहीं रहा होगा। मैं इसके लिए सिर्फ शासन प्रशासन को ही दोष नहीं देना चाहूंगा, इन सबके लिए समाज भी दोषी है। जिस समाज में कमजोर की मदद करने की परम्परा रही है। बुरे वक्त में सहारा देने परम्परा रही है। मिल-जुलकर काम करने की परम्परा रही है। उस देश में कमजोर को दबाना, बुरे वक्त में उसकी हंसी उड़ाना। व्यक्तिवादी बनना, गरीब को कीड़े मकौड़े समझना समाज की नियति बनती जा रही है।
यदि ये बच्चे नेताओं नौकरशाह या पूंजीपतियों के रहे होते तो देश में अब तक आग लग चुकी होती और ये ही लोग लगाते जो बस बच्चों की हत्या कर रहे हैं और लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। मैं देश के किसान-मजदूर गरीब और बेसहाय लोगों से कहना चाहूंगा कि चाहे सत्ता पक्ष और या फिर विपक्ष दोनों संपन्न लोगों के लिए काम कर रहे हैं। ये सब लोग भी तो पूंजीपति ही हैं। कैसे आएगा आपके और आपके बच्चों के लिए दर्द ? जब तक देश का किसान-मजदूर देश की सत्ता नहीं कब्जायेगा तब तक ऐसे ही हमारे बच्चों की हत्या होती रहेगी। अभी से जुट जाओ अपने बीच में से कोई क्षेत्र का जनप्रतिनिधि बनाने के लिए। प्रधानमंत्री गरीबी का ढकोसला कर पूंजीपतियों के लिए काम कर रहे हैं ।
2019 के चुनाव में किसी भी हालत में पूंजीपतियों के हाथों में सत्ता नहीं जाने देनी है। अब लड़ाई नौकरी लेने या बचाने की नहीं। खेत बोने या काटने की नहीं। बच्चों को पढ़ने या पढ़ाने की नहीं बल्कि अस्तित्व बचाने की है। देश का प्रधानमंत्री बना बैठा यह व्यक्ति व्यापारी है, जिसने देश के हर तंत्र को बेचने की ठान ली है। बेचना इस व्यक्ति के डीएनए में है। जिस स्टेशन पर चाय बेचता था वह स्टेशन ही बेच रहा है। जिस ट्रेन में चलता था वह ट्रेन ही बेच दे रहा है। जिस एअर इंडिया में हवाई सफर करता था, उसको ही बेच दे रहा है। जल्द ही भूमि अधिग्रहण विधेयक लाकर किसानों की जमीन भी पूंजीपतियों को बेचने वाला है। श्रम कानून में संशोधन कर मजदूर की मजदूरी बेचने वाला है। देश की सुरक्षा बेचने की तैयारी है। यानि कि सुब कुछ बेचना है। यह देश सम्पन्न लोगों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। यह बात आम आदमी को समझ लेनी होगी।
ऐसे ही बच्चे और युवा दम तोड़ते रहे तो वह दिन दूर नहीं कि एक दिन आप भी अपने बच्चों के लिए ऐसे ही रो रहे होंगे जैसे ये गरीब लोग रो रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार मेडिकल प्रबंधन और इससे जुड़े व्यापारियों ने मिलकर बच्चों की हत्या की है। ये मौत नहीं नर संहार है। देश में चल रहे सत्ता के खेल से मानवता, संवेदलशीलता, कर्तव्यपरायणता, भाईचारा मेल-मोहब्बत, प्यार स्नेह जैसे शब्द जैसे समाज से गायब होते जा रहे हैं। मैंने जो पढ़ा-लिखा है और मेरी जिंदगी का जो भी अनुभव रहा है। उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि देश में इससे बुरा माहौल नहीं रहा होगा। मैं इसके लिए सिर्फ शासन प्रशासन को ही दोष नहीं देना चाहूंगा, इन सबके लिए समाज भी दोषी है। जिस समाज में कमजोर की मदद करने की परम्परा रही है। बुरे वक्त में सहारा देने परम्परा रही है। मिल-जुलकर काम करने की परम्परा रही है। उस देश में कमजोर को दबाना, बुरे वक्त में उसकी हंसी उड़ाना। व्यक्तिवादी बनना, गरीब को कीड़े मकौड़े समझना समाज की नियति बनती जा रही है।
यदि ये बच्चे नेताओं नौकरशाह या पूंजीपतियों के रहे होते तो देश में अब तक आग लग चुकी होती और ये ही लोग लगाते जो बस बच्चों की हत्या कर रहे हैं और लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। मैं देश के किसान-मजदूर गरीब और बेसहाय लोगों से कहना चाहूंगा कि चाहे सत्ता पक्ष और या फिर विपक्ष दोनों संपन्न लोगों के लिए काम कर रहे हैं। ये सब लोग भी तो पूंजीपति ही हैं। कैसे आएगा आपके और आपके बच्चों के लिए दर्द ? जब तक देश का किसान-मजदूर देश की सत्ता नहीं कब्जायेगा तब तक ऐसे ही हमारे बच्चों की हत्या होती रहेगी। अभी से जुट जाओ अपने बीच में से कोई क्षेत्र का जनप्रतिनिधि बनाने के लिए। प्रधानमंत्री गरीबी का ढकोसला कर पूंजीपतियों के लिए काम कर रहे हैं ।
2019 के चुनाव में किसी भी हालत में पूंजीपतियों के हाथों में सत्ता नहीं जाने देनी है। अब लड़ाई नौकरी लेने या बचाने की नहीं। खेत बोने या काटने की नहीं। बच्चों को पढ़ने या पढ़ाने की नहीं बल्कि अस्तित्व बचाने की है। देश का प्रधानमंत्री बना बैठा यह व्यक्ति व्यापारी है, जिसने देश के हर तंत्र को बेचने की ठान ली है। बेचना इस व्यक्ति के डीएनए में है। जिस स्टेशन पर चाय बेचता था वह स्टेशन ही बेच रहा है। जिस ट्रेन में चलता था वह ट्रेन ही बेच दे रहा है। जिस एअर इंडिया में हवाई सफर करता था, उसको ही बेच दे रहा है। जल्द ही भूमि अधिग्रहण विधेयक लाकर किसानों की जमीन भी पूंजीपतियों को बेचने वाला है। श्रम कानून में संशोधन कर मजदूर की मजदूरी बेचने वाला है। देश की सुरक्षा बेचने की तैयारी है। यानि कि सुब कुछ बेचना है। यह देश सम्पन्न लोगों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। यह बात आम आदमी को समझ लेनी होगी।
Friday, 28 July 2017
चुल्लूभर पानी में डूब मरो नीतीश कुमार ?
नीतीश कुमार के इस्तीफा देकर
भाजपा से मिलने पर भले ही लोग इसे महागठबंधन और विपक्ष के कमजोर होने की
बात कर रहे हों। उन्हें धोखेबाज़ करार दे रहे हों पर उनके इस रवैये से
समाजवादी विचारधारा को जो बड़ा झटका लगा है वह सबसे बड़ी बात है । जो नीतीश
कुमार समाजवाद के प्रणेता डा. राम मनोहर लोहिया के गैर कांग्रेसवाद की तर्ज
पर गैर संघवाद का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने
निकले थे। वे अब उन्हीं संघी मोदी की रहमोकरम पर फिर से सत्ता का सुख
भोगेंगे। उनकी इस हरकत से गिरा है समाजवाद का स्तर ? नीतीश जी आप तो हर
बात में लोहिया जी की बात करते थे, आप लोहिया क्या बनते आप तो लोहिया का
बाल भी न बन सके। साम्प्रदायिक ताकतों के सामने घुटने टेक कर आपने साबित कर
दिया कि आप भी सत्ता के लोभी हैं। यदि आपको याद हो तो जब मुलायम सिंह
ने बिहार चुनाव में शामिल न होकर महागठबन्धन कमजोर किया था तब आप आपे से
बाहर हो गए थे। अब जब निजी स्वार्थ के चलते आपने महागठबंधन तोड़ा है तो आपके
बारे में क्या कहा जाए ?
यदि आज आपको लालू प्रसाद और उनके परिजनों के काले कारनामे दिखाई दे रहे हैं तो जब मिलकर चुनाव लड़ा था और जीतकर सरकार बनाई थी तब आपको लालू दागी नज़र नहीं आ रहे थे। तब तो लालू प्रसाद चारा घोटाले के मामले में जेल में बंद थे। तो क्या मोदी से मिलकर देश के प्रधानमंत्री बनोगे ? अब और क्या चाहिए आपको ? केंद्रीय मंत्री के साथ ही कई बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। मत बनते प्रधानमंत्री पर प्रयास तो करते। आज आपकी और मुलायम सिंह यादव की हरकत देखकर लोहिया जी आत्मा रो रही होगी। यदि लालू का साथ रास नहीं आ रहा था तो समाजवादी विचारधारा को लेकर चुनाव के मैदान में जाते। जब देश में साम्प्रदायिक ताकतें नंगा नाच कर रही हैं। किसान आत्महत्या कर रहा है। रोजगार के नाम पर नौजवानों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। बीच चौराहे पर जाति धर्म के नाम पर लोगों को मार दिया जा रहा है। गरीबों के खून पसीने की कमाई को दोनों हाथों से लुटाया जा रहा है। ऐसे में आप संघर्ष करने के बजाय सत्ता की मलाई चाटने मोदी की गोदी में बैठ गए हो। शर्म करो। डूब मारो चुल्लू भर पानी में। अब तो समाजवादी चोले को उतार दो, कब तक बिहार की भोली-भाली जनता को ठगते रहोगे ?
यदि आज आपको लालू प्रसाद और उनके परिजनों के काले कारनामे दिखाई दे रहे हैं तो जब मिलकर चुनाव लड़ा था और जीतकर सरकार बनाई थी तब आपको लालू दागी नज़र नहीं आ रहे थे। तब तो लालू प्रसाद चारा घोटाले के मामले में जेल में बंद थे। तो क्या मोदी से मिलकर देश के प्रधानमंत्री बनोगे ? अब और क्या चाहिए आपको ? केंद्रीय मंत्री के साथ ही कई बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। मत बनते प्रधानमंत्री पर प्रयास तो करते। आज आपकी और मुलायम सिंह यादव की हरकत देखकर लोहिया जी आत्मा रो रही होगी। यदि लालू का साथ रास नहीं आ रहा था तो समाजवादी विचारधारा को लेकर चुनाव के मैदान में जाते। जब देश में साम्प्रदायिक ताकतें नंगा नाच कर रही हैं। किसान आत्महत्या कर रहा है। रोजगार के नाम पर नौजवानों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। बीच चौराहे पर जाति धर्म के नाम पर लोगों को मार दिया जा रहा है। गरीबों के खून पसीने की कमाई को दोनों हाथों से लुटाया जा रहा है। ऐसे में आप संघर्ष करने के बजाय सत्ता की मलाई चाटने मोदी की गोदी में बैठ गए हो। शर्म करो। डूब मारो चुल्लू भर पानी में। अब तो समाजवादी चोले को उतार दो, कब तक बिहार की भोली-भाली जनता को ठगते रहोगे ?
राष्ट्रीय अध्यक्ष, फाइट फॉर राइट
Wednesday, 12 April 2017
गंभीर रूप ले रहा मुस्लिमों के खिलाफ बन रहा माहौल
बहुत संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की कोशिश कर रहा हूं। आज की तारीख में यह लिखना बनता भी है। मैं बात कर रहा हूं पुरे विश्व में मुस्लिमों के खिलाफ बन रहे माहौल की। चाहे अमरीका हो, रूस हो, फ्रांस हो, नेपाल हो या फिर भारत या फिर गैर मुस्लिम अन्य कोई देश लगभग सभी देशों में मुस्लिमों के खिलाफ एक अजब सा माहौल बनता जा रहा है। यहां तक कि मुस्लिमों का साथ देते आ रहे चीन में भी। जो मुस्लिम देश हैं या तो वे दूसरे समुदायों से भिड़ रहे हैं या फिर आतंकवाद से जूझ रहे हैं। कहना गलत न होगा कि मुस्लिम समाज पर एक आफत सी आ गई है।
मैं इस माहौल का बड़ा कारण मुस्लिम समाज में पनपे आतंकवादी संगठनों को मानता हूं। चाहे आईएसआईएस हो, लस्कर ए तैयबा हो। या फिर अन्य कोई संगठन। लगभग सभी आतंकी संगठन किसी न किसी रूप में मुस्लिम समाज से संबंध रखते हैं। यही वजह है कि जब भी आतंकवाद पर कोई बड़ी बहस होती है तो मुस्लिम समाज को कटघरे में खड़ा किया जाता है। आतंकवाद मुद्दे पर मुस्लिम समाज की चुप्पी से गलत संदेश जा रहा है। मुस्लिमों को समझना होगा कि आतंकवाद मुद्दे पर मुस्लिम देश के रूप में पहचान बना चुपे पाकिस्तान की खुलकर पैरवी करने वाले चीन में भी मुस्लिमों के लिए अच्छी खबर नहीं आ रही हैं। हाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हाफिज सईद की पैरवी करने तथा आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का साथ न देने वाले चीन में इन दिनों इस्लाम-विरोधी माहौल बन रहा है। हाल ही में केंद्रीय चीन स्थित शहर नांगांग में जब एक मस्जिद बनने का प्रस्ताव पारित हुआ तो स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर मुस्लिम-विरोधी संदेश पोस्ट करने लगे। मुस्लिम बहुल शिनजांग प्रांत में चीन ने दाढ़ी रखने-बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही धार्मिक तरीके से शादी करने पर रोक लगा दी गई। विश्व की बड़ी शक्ति माने जाने वाले अमरीका के राष्ट्रपति डोलाल्ड ट्रंप मुस्लिमों को लेकर कोर्ट से भी टकराने को तैयार हैं। सबसे महफूज जगह भारत में भी मुस्लिमों के खिलाफ बड़ा भयानक माहौल बना हुआ है।
अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज को इन सब पर मंथन करना होगा। एक देश समझ में आ सकता है। एक समाज समझ में आ सकता है। पूरे विश्व में यदि मुस्लिमों के खिलाफ माहौल बना है तो यह निश्चित रूप से बड़ी बहस का मुद्दा है। मुस्लिम समाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंथन करना होगा कि आखिर उनके समाज में ऐसी क्या-क्या कमियां आ गईं कि सभी के सभी उनके पीछे पड़ गए। उनको संदेह की दृष्टि से देखने वाले लोगों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ सड़कों पर क्यों नहीं उतर रहे है ? क्यों नहीं उन लोगों का विरोध करते जो आतंकवाद के मुद्दे पर पूरे के पूरे मुस्लिम समाज को घसीट लेते हैं। मुझे लगता है कि आज फिर मुस्लिम समाज को उस भाईचारे को लेकर अभियान की जरूरत है, जिसके लिए इस समाज ने समय-समय पर लोकप्रियता बटोरी है। जो आतंकवाद पूरी मानव जाति का दुश्मन बना हुआ है, उसके खिलाफ मुस्लिम समाज को ही मोर्चा संभालना होगा। जो राजनीतिक दल वोटबैंक के रूप में उनका इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें मुंह तोड़ जवाब देना होगा। भटके बच्चों को हथियार और कलम का अंतर समझाना होगा। मुस्लिम समाज से हो रही नफरत को बड़ी चुनौती के रूप में लेना होगा। मुस्लिम समाज के प्रतीक माने जाने वाले दाढ़ी, बुर्के को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर जो संदेह व्यक्त किया जा रहा है उस पर बड़े स्तर पर मंथन की जरूरत है। मुस्लिम समाज के साथ ही अन्य समाज के गणमान्य लोगों को भी आगे आकर पूरे विश्व में बने रहे घृणा, नफरत के माहौल को समाप्त कर भाईचारे के माहौल को बनाने की पहल करनी होगी। बात मुस्लिम समाज की ही नहीं है, पूरे विश्व में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि हर देश में नस्लीय हमले बढ़े हैं। जिससे विभिन्न देशों में रह रहे विभिन्न देशों के युवाओं के लिए खतरा पैदा हो गया है। इस सब के लिए कौन जिम्मेदार हैं ? कौन हैं इस तरह का माहौल बनाने वाले लोग ? कौन लोग हैं जो इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं ? इन सब लोगों को बेनकाब करना होगा।
चरण सिंह राजपूत
राष्ट्रीय अध्यक्ष फाइट फॉर राइट
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